ज़ीस्त है जब तक ये करम रहने दे
अनकहा है जो हमको भी कहने दे !
कुम्हलाये ही सही फिर भी फूल हैं,
कुचल देना पैरों तले भरम रहने दे !
बेसबब , बेअसर ,नाकाम ही सही ,
अहसासों का अनवरत चरम रहने दे !
हर कोना वीरान हैं हालात है बेरहम,
अज़मत होगी थोड़ा वहम रहने दे !
मौसम-ए-दहर में कब्ज़ा है ख़िज़ाँ का,
दिले चमन पर थोड़ा रहम रहने दे !! – चुन्नी <3 :)
दिले चमन पर थोड़ा रहम रहने दे !! – चुन्नी <3 :)
# ज़ीस्त = जींदगी / जीवन
# मौसम-ए-दहर = दुनियां का मौसम
# ख़िज़ाँ
= पतझड़


