रीड़ की
हड्डी से होकर
दौड़ जाती है/ सिहरन ....!!
स्तब्ध बस्ती की वीरान खामोशी में
दौड़ जाती है/ सिहरन ....!!
स्तब्ध बस्ती की वीरान खामोशी में
कभी- कभी अनायास ही गूंज उठती है,
बूटों के कदमताल की आवाज़ !!
और फिर से पसर जाता है/
मातमी सन्नाटा...!!
क्या घटा है यहाँ ?
निष्ठुर अधेरों के साथ
हवा हाँफने लगी है...!!
हताशा में डूबी चंदनी
लहरों में कांपने लगी है !
अनायस ही सायरन की आवाज से
भंग हो जाती है मुर्दा शांति/
मुरझाई हुई है
बहुत
उदास है
चाँद
की कान्ति…!
तार पर बैठी अकेली चिड़िया
बेचैनी से तांक रही है
तार पर बैठी अकेली चिड़िया
बेचैनी से तांक रही है
इधर – उधर
अधजले/गुंगवाते मकानों के भग्नावशेष/
मौत के तांडव की स्याह छाया/
बेतरतीबी से बिखर कर गाड़ा हो चुका
लाला रंग...!!
खौफजदा/ घुटी हुई मुर्दानी सिसकियां...!!
जिंदा लाशों के बीच-
कुछ बदरंग व दहशत ज़दा चेहरे /
चलो…! उठो तोडो
अधजले/गुंगवाते मकानों के भग्नावशेष/
मौत के तांडव की स्याह छाया/
बेतरतीबी से बिखर कर गाड़ा हो चुका
लाला रंग...!!
खौफजदा/ घुटी हुई मुर्दानी सिसकियां...!!
जिंदा लाशों के बीच-
कुछ बदरंग व दहशत ज़दा चेहरे /
चलो…! उठो तोडो
इस गहन
हताशा को ...
पकड़ लो ...! जकड़ लो ...!!!
कही सूरज….
पकड़ लो ...! जकड़ लो ...!!!
कही सूरज….
अस्त
ना हो जाये
समूची मानवता
ध्वस्त न हो जाये...!!!!- प्रेरक चुन्नी
समूची मानवता
ध्वस्त न हो जाये...!!!!- प्रेरक चुन्नी

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