अहसास है,,,
भूख से व्यकुल आँखों में
पलते रोटी के सपनों का !
अहसास है,,,
एसिड अटैक से झुलसी
किसी मासूम के चितकार के स्वर का !
अहसास हैं,,,
धूप में झुलसी हुई किसान की
काली त्वचा से बहते हुये पसीने की गंध का !
अहसास है,,,
सरहद पर घायल जावन की
देह से रिसते हुआ लहू का !
अहसास है,,,
भूखे भेड़ियों व्दारा असमत लूटी बच्ची के
क्षत विक्षत देह पर अमानवीय बरबरता के
इंसानित को शर्मसार करने वाला
हृदय विदारक दृश्य का !
अहसास है,,,
सियाचीन की बर्फीली पहाड़ियों
में सरहद के पहरी के आईसबर्न से
गली हुई अंगुलियों से उठती हुई टीस का !
अहसास है,,,,
अपने बेटे / बहू से पिटती
बुढ़ी असाहय माँ के
झुर्री वाले गालो पर बहते आंसुओं में
लिपटी अनकही पीड़ा के मौन स्वर का !
अहसास है,,,
गोली खाकर जमीन पर गिरते
बूढ़े महत्मा के मुंख से
प्रस्फुटित अंतिम शब्द “हे राम ” का !
अहसास है,,,
दीवार पर जिंदा चुनवा दिये गये
सिख्खधर्म गुरु के मासूम बेटों के
रुदन के स्वर का !
अहसास है,,,
सलीब पर काँटों का ताज
पहना कर लटका दिये गये
जीजस की आखरी बात का
“हे ईश्वर ! इन्हें माफ करना
ये नही जानते की-
ये क्या कर रहे है ”...!
दाता !
अहसास बहुत गहरा है
लेकिन,,,,,
तू ही बता कैसे माफ करे
हम इंसान हैं / देवता नही !! – भावुक चुन्नी
No comments:
Post a Comment